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बीसीएमएल का पीएलए प्लांट होगा अगले साल शुरू

By Sugar Times Team

4 March 2025

बीसीएमएल का पीएलए प्लांट होगा अगले साल शुरू

बलरामपुर चीनी मिल्स के बोर्ड ने परियोजना के पूंजीगत व्यय में संशोधन के साथ प्रस्तावित पीएलए प्लांट की उच्च क्षमता को मंजूरी दे दी है। इसकी कार्यकारी निदेशक अवंतिका सरावगी ने कहा कि कंपनी का उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) प्लांट वित्तीय वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में चालू होने की उम्मीद है। परियोजना समय पर है। बढ़ा हुआ पूंजीगत व्यय संयंत्र को अधिक कुशल बनाने व परिचालन व्यय को बचाने के लिए है। साथ ही, हमें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित बायोप्लास्टिक नीति का भी लाभमिला। पूंजीगत सब्सिडी के संदर्भमें, हमें राज्य सरकार की योजना के अनुसार लगभग 1,100 करोड़ की मिलने उम्मीद है। इसलिए सब्सिडी के बाद, परियोजना का शुद्ध पूंजीगत व्यय 1,750 करोड़ होगा। इस वर्ष की दूसरी छमाही में हम पीएलए बेचना शुरू कर देंगे।

इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में स्टैंडअलोन आधार पर बढ़ा है। हालांकि राजस्व में गिरावट आई है। इसके पीछे के कारण पर सरावगी ने कहा कि एथेनॉल वर्ष का अंत (जो नवंबर में समाप्त होता है) तीसरी तिमाही का हिस्सा है। पिछले साल से पिछले साल तक, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन पर कोई प्रतिबंध नहीं था। लेकिन पिछले साल एथेनॉल पर प्रतिबंध था। हम गन्ने के रस से उत्पादन नहीं कर सकते थे। इसलिए एथेनॉल वर्ष की अंतिम तिमाही में, हमारे भंडारण में शून्य एथेनॉल था। यही कारण है कि डिस्टिलरी से राजस्व कम था। पिछले साल की तुलना में हमारे पास अधिक इन्वेंट्री है क्योंकि हमने अधिक चीनी का उत्पादन किया था और पूरे साल चीनी बेची गई थी।

अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगा डिस्टिलरी सेगमेंट

चीनी की कीमतों पर अपना

दृष्टिकोण रखते हुए अवंतिका ने बताया कि यह स्थिर होनी चाहिए। सरकार ने इस साल एथेनॉल की कीमतें नहीं बढ़ाई, लेकिन उसने एक निश्चित मात्रा में चीनी निर्यात करने की अनुमति दी, इसलिए कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। यह वैश्विक कीमतों के बराबर है, जोकि अच्छी बात है। इस वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी के डिस्टिलरी सेगमेंट के प्रदर्शन पर उनका कहना है कि चूंकि एथेनॉल की कीमतों में संशोधन नहीं हुआ है, इसलिए मुझे लगता है डिस्टिलरी सेगमेंट अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगा। इनपुट कीमत बढ़ी है, लेकिन आउटपुट कीमत नहीं बढ़ी है. साथ ही रिकवरी थोड़ी कम है। गन्ने का एफआरपी ₹305 से बढ़कर ₹340 प्रति क्विंटल हो गया है, लेकिन एथेनॉल की कीमत में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। 2023 से पहले, जब भी गन्ने की कीमत एफआरपी बढ़ाई जाती थी तो एथेनॉल की कीमत अपने आप उसी प्रतिशत तक बढ़ जाती थी। लेकिन अबकी बार ऐसा नहीं हुआ।

बीसीएमएल का मुनाफा 23% घटा

बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल) ने 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त तिमाही में अपने शुद्ध लाभ में 22.83 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जो 70.47 करोड़ रुपये रहा। विनियामक फाइलिंग के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 91.32 करोड़ रुपये था। बीसीएमएल के परिचालन से राजस्व में भी 3.10 प्रतिशत की कमी देखी गई, जो समीक्षाधीन तिमाही के दौरान 1,192.14 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,230.38 करोड़ रुपये था।

बीसीएमएल भारत की सबसे बड़ी एकीकृत चीनी कंपनियों में से एक है। कंपनी के संबद्ध व्यवसायों में डिस्टिलरी संचालन और बिजली का सह-उत्पादन शामिल है। कंपनी के पास वर्तमान में उत्तर प्रदेश में स्थित दस चीनी मिलें हैं, जिनकी कुल गन्ना पेराई क्षमता 80,000 टीसीडी है। डिस्टिलरी और सह-उत्पादन संचालन क्रमशः 1050 केएलपीडी और 175.7 मेगावाट (बिक्री योग्य) है। बीसीएमएल 80,000 टीपीए क्षमता का भारत का पहला पॉली लैक्टिक एसिड (पीएलए) संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में भी है।

फरवरी में बंद हो सकती हैं चीनी मिलें

पिछले वर्ष बरेली में आई बाढ़ की वजह से गन्ने का उत्पादन प्रभावित हो गया था। बाढ़ की वजह से अधिकांश किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। इसका असर पेराई सत्र पर देखा जा रहा है। बरेली जिले की चीनी मिलों पर नोकेन का संकट मंडरा रहा है। गत वर्ष आई बाढ़ में गन्ने की फसल बर्बाद हो जाने की वजह से उत्पादन प्रभावित हो गया। इस वजह से मिलों को किसानों से गन्ना नहीं मिल पा रहा है। इस वर्ष चीनी मिलें फरवरी माह में ही बंद हो सकती हैं। स्थिति यह है कि इन दिनों चीनी मिलें तीन घंटे तक ही संचालित हो रही हैं।

दूसरी ओर गन्ने की प्रजाति 238 में रेड रॉट लग गया। इस वजह से भी फसल प्रभावित हो गई जिसका असर अब देखने को मिल रहा है। वर्तमान में बरेली जनपद में पांच चीनी मिलें हैं। गत वर्ष 204 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी। लेकिन इस वर्ष अब तक सिर्फ 180 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई है। स्थिति यह है कि 24 घंटे चलने वाली मिलें किसानों से गन्ना न मिलने के कारण कुल तीन घंटे ही संचालित हो रही हैं। गन्ना सत्र की शुरुआत गत वर्ष नवंबर माह में हो गई थी। इसी दौरान चीनी मिलों का संचालन शुरू हो गया था।

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Sugar Times Team

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Published: 4 March 2025

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