लखनऊ – उत्तर प्रदेश की 133 चीनी मिलों ने देशभर में सबसे ज़्यादा चीनी उत्पादन कर राज्य को इस क्षेत्र में नंबर-1 बना दिया है। इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने इन मिलों के प्रतिनिधियों के साथ एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. आर.पी. सिंह ने कहा कि चीनी उद्योग न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाता है, बल्कि यह लाखों किसानों और श्रमिकों को रोजगार भी देता है। इन मिलों का योगदान राज्य की GDP को मज़बूत करने में भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने मिलों से आग्रह किया कि अब समय आ गया है कि उन्नत तकनीकों को अपनाया जाए ताकि उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे। उन्होंने खासतौर पर तीन तकनीकों पर ज़ोर दिया:
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अपशिष्ट उपचार संयंत्र (Effluent Treatment Plant)
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उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली
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कम ईंधन खपत करने वाली तकनीकें
बोर्ड ने आश्वासन दिया कि वह उद्योगों को पर्यावरणीय नियमों का पालन कराने में सहयोग करता रहेगा और आवश्यक सुधारों पर काम करता रहेगा।
डॉ. यशपाल सिंह, जो यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन के तकनीकी सलाहकार हैं, उन्होंने शुगर मिलों की समस्याओं और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा लाए गए चार्टर 2.0 पर जानकारी दी।
लखनऊ के क्षेत्रीय निदेशक कमल कुमार ने चार्टर के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए मिलों से अनुरोध किया कि वे CPCB की वेबसाइट पर जाकर पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों की नियमित जांच करें और अपने सुझाव व शिकायतें लिखित में भेजें।
इस कार्यक्रम में अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य पर्यावरण अधिकारी, तकनीकी सलाहकार और कानूनी अधिकारी शामिल थे।
अंत में बोर्ड की ओर से कहा गया कि भविष्य में भी इस तरह के संवाद जारी रहेंगे, जिससे उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।