Sunday, June 23, 2024
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कृषि निर्यात घटने से एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट में आयी गिरावट

महंगाई को नियंत्रित करने के उपायों से सरकार को राजस्व में कमी का नुकसान उठाना पड़ रहा है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए पिछले साल कई कृषि उत्पादों के निर्यात को बैन किया गया था। इससे २०२३-२४ में एग्री एक्सपोर्ट में गिरावट आई है जिसमें लाल सागर संकट और भूराजनीतिक तनाव का भी बड़ा रोल है। एग्री एक्सपोर्ट कम होने से कृषि विकास दर में गिरावट दर्ज की गई है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए गैर बासमती चावल, गेहूं, चीनी और प्याज जैसे आइटम्स शामिल थे। जिन पर बैन लगया गया। २०२२ में महंगाई बढ़ने के बाद सरकार ने मेहनत की थी। इसमें आयात को सस्ता करने से लेकर दाम में बढ़ोतरी रोकने के लिए निर्यात पर रोक लगाना तक शामिल था। सरकार के इन कदमों से देश में महंगाई को काबू करने में काफी मदद मिली थी।

चीनी-चावल-गेहूं के निर्यात पर लगा रोक

सस्ते आयात ने जहां खाद्य तेलों के दाम घटाने में मदद की वहीं चावल-गेहूं के एक्सपोर्ट को रोकने से इनके दाम भी काबू में बने रहे। लेकिन, इसके असर से देश का कृषि निर्यात कारोबारी साल २०२३-२४ में अप्रैल से फरवरी के दौरान ८.८ फीसदी घटकर ४३.७ अरब डॉलर पर आ गया। २०२२-२३ की अप्रैल-फरवरी अवधि में कृषि एक्सपोर्ट ४७.९ अरब डॉलर रहा था। निर्यात घटने की वजहों में गैर बासमती चावल, गेहूं, चीनी और प्याज जैसे सामानों के एक्सपोर्ट पर रोक के साथ ही लाल सागर संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध शामिल रहे। कृषि एक्सपोर्ट में गिरावट आने से कृषि की विकास दर में भी कारोबारी साल २०२३-२४ के दौरान गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक देश के कृषि सेक्टर का बीते कारोबारी साल में ग्रोथ रेट महज ०.७ परसेंट रहा। जबकि, २०२२-२३ में कृषि की विकास दर ४.७ फीसदी थी। एग्री और प्रोसेस्ड फूड उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा के निर्यात आंकड़ों पर नजर डालें तो इसकी ‘बास्केट’ में ७१९ लिस्टेड कृषि उत्पादों का निर्यात अप्रैल २०२३ से फरवरी २०२४ के ११ महीनों के दौरान ६.८५ फीसदी घटकर २२.४ अरब डॉलर रहा। जबकि, अप्रैल-फरवरी २०२२- २३ में ये २४ अरब डॉलर था। बास्केट में शामिल २४ प्रमुख सामानों में से १७ में इस दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। इनमें ताजे फल, भैंस का मांस, प्रोसेस्ड सब्जियां, बासमती चावल और केला शामिल हैं। दाम के हिसाब से बासमती चावल का निर्यात २२ परसेंट बढ़कर अप्रैल-फरवरी २०२३-२४ में ५.२ अरब डॉलर रहा। जबकि अप्रैल- फरवरी २०२२-२३ में ये ४.२ अरब डॉलर था। अब सरकार केला, आम, आलू और बेबी कार्न समेत २० कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक योजना तैयार कर रही है। वाणिज्य विभाग के मुताबिक इनमें से हरेक उत्पाद के लिए योजना अगले ३ से ४ महीनों में तैयार होने का भरोसा है, जिन २० उत्पादों की पहचान की गई है उनका २०२२ में वैश्विक व्यापार ४०५.२४ अरब डॉलर था जिसमें भारत का निर्यात महज ९.०३ अरब डॉलर था। इससे उम्मीद है कि मौजूदा कारोबारी साल यानी २०२४- २५ में एग्री एक्सपोर्ट में तेजी आ सकती है। (आजतक ब्यूरो

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