समय पर नहीं हो रहा गन्ने का भुगतान, गन्ने की खेती छोड़ रहे किसान

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Wed, 01 Jan 2020         शाहबाद : समय पर गन्ने का भुगतान न होने के कारण किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग होता जा रहा है। यही कारण है कि क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में लगातार गन्ने का रकवा कम होता जा रहा है।

गन्ना किसानों की दिक्कते बढ़ती जा रही हैं। चीनी मिल समय से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं करती। इस सीजन में पिछले सीजन का भुगतान किया है। ऐसी स्थिति में किसान दिन पर दिन दबता जा रहा है। ज्यादातर किसानों के बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड होते हैं। बैंक द्वारा उस पर पहले वर्ष करीब चार फीसद का ब्याज जोड़ा जाता है। एक वर्ष में अगर किसान उस ब्याज को जमा नहीं करता है तो दूसरे वर्ष बैंक किसान से सात फीसद का ब्याज वसूलती है। जब गन्ने का भुगतान तीसरे वर्ष हुआ तब तक बैंक 12 फीसद का ब्याज लगाकर किसान की आरसी काट देती है। तहसील में आरसी पहुंचने पर अधिकारी किसान के घर पर चक्कर काटना शुरू कर देते हैं। ऐसी स्थिति में किसान के पास उसकी जमीन की नीलामी होने या आत्महत्या के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं रह जाता है। गन्ने का भुगतान शुगर मिल द्वारा कभी भी गन्ना अधिनियम के तहत नहीं किया गया। गन्ना अधिनियम में शुगर मिल को गन्ना लेने के 14 दिन के भीतर भुगतान करने की हिदायत दी गई है। निर्धारित अवधि के बाद मय ब्याज के भुगतान करने का नियम है। हर वर्ष शुगर मिल देरी से गन्ना किसान को बिना ब्याज के भुगतान देती है, जबकि बैंक उनसे एक वर्ष के बाद सात प्रतिशत एवं दो वर्ष के बाद करीब 12 प्रतिशत का ब्याज वसूलती है। हर वर्ष काफी किसान गन्ना समिति का सद्स्य बनने से रह जाते हैं। ऐसे किसानों पर विभाग भी ध्यान नहीं देता है, जिसके कारण ऐसे गन्ना किसानों को कम दामों पर मंडी या कोल्हू पर गन्ना डालना पड़ता है। इस दौरान अगर कोई अधिकारी उन्हें पकड़ ले तो उन्हें रिपोर्ट दर्ज होने का भी दंश झेलना पड़ता है। इसी तरह से अगर गन्ना किसानों पर ऐसी परेशानी आती रही तो हर वर्ष कम होने वाले गन्ने का रकवा और कम हो सकता है। शुगर मिल समय पर भुगतान नहीं करती है इसलिए गन्ने की खेती छोड़ने का मन बना रहे हैं। पहले की अपेक्षा गन्ना कम कर दिया है। हरस्वरुप। गन्ने की खेती दिन पर दिन घाटे की खेती होती जा रही है। शुगर मिल से क्षेत्र के किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है। मील पर लगने वाले जाम से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।   Posted By: Jagran