अक्टूबर-दिसंबर 2019 में चीनी उत्पादन 30.22 प्रतिशत कम, कीमतें मजबूत : इस्मा

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नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) देश का चीनी उत्पादन, सितंबर में समाप्त हो रहे चालू विपणन वर्ष के पहले तीन महीनों में 30.22 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 77.9 लाख टन रहा। चीन उद्योग ने यह जानकारी देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि उत्पादन में गिरावट के बावजूद चीनी का मिल भाव मजबूत है और इससे मिलों को किसानों के गन्ना बकायों का भुगतान करने में असानी हो रही है। इस्मा ने कहा कि चालू पेराई सत्र में दिसंबर 2019 के अंत में तक देश का कुल चीनी उत्पादन 77.9 लाख टन रहा। चीनी उत्पादन विपणन वर्ष 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) की इसी अवधि में उत्पादन एक करोड़ 11.7 लाख टन था। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने बाजार के आंकड़ों के हवाले से कहा कि हालांकि, चीनी निर्यात अच्छी गति से हो रहा है। इस्मा ने कहा कि चीनी मिलों ने अभी तक सरकार के एमएईक्यू (अधिकतम स्वीकार्य निर्यात मात्रा कोटा या ‘मैक्सिमम एडमिशेबल एक्सपोर्ट क्वांटिटी कोटा’) के तहत 25 लाख टन के करीब चीनी के निर्यात के लिए अनुबंध किया है। इस्मा ने कहा कि चीनी की एक्स-मिल कीमतें उत्तरी भारत में 3,250-3,350 रुपये प्रति क्विंटल और दक्षिण भारत में 3,100-3,250 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में स्थिर बनी हुई हैं।

इस्मा ने एक बयान में कहा, ‘‘चूंकि केंद्र ने 2019-20 के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में वृद्धि नहीं की है तथा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसी राज्य सरकारों ने प्रदेश परामर्शित मूल्य (एसएपी) में बढ़ोतरी नहीं की है, इसलिए चीनी की एक्स-मिल कीमत स्थिर बनी हुई हैं, जिससे चीनी मिलें, किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान करने के लिहाज से बेहतर स्थिति में हैं।’’ अपने पहले अनुमान में, इस्मा ने इस वर्ष चीनी उत्पादन 2.6 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है। वर्ष 2018-19 में उत्पादन तीन करोड़ 31.6 लाख टन था। चीनी उत्पादन का दूसरा अनुमान अगले महीने जारी किया जायेगा। देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य – महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन – दिसंबर 2019 तक घटकर 16.5 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 44.5 लाख टन का उत्पादन हुआ था। बाढ़ से प्रभावित गन्ने की फसल में सुक्रोज की मात्रा कम होने से महाराष्ट्र में चीनी की औसत रिकवरी (प्राप्ति) एक साल पहले के 10.5 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई।इस्मा के अनुसार राज्य सरकार ने बताया है कि अहमदनगर और औरंगाबाद में एक-एक मिल ने गन्ने की कटाई के लिए श्रमिकों की तंगी और गन्ने की कमी के कारण पेराई बंद कर दी है।

दिसंबर 2019 के अंत में कुल 137 चीनी मिलें चालू थीं, जबकि पिछले साल इस दौर में 189 मिलें चल रही थीं। चीनी के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन एक साल पहले के 31 लाख टन की तुलना में अभी तक बढ़कर 33.1 लाख टन हो गया है। यहां अभी तक लगभग 119 मिलें परिचालन में हैं और चीनी की औसत रिकवरी 10.71 प्रतिशत है। लगभग 18 से 20 चीनी मिलें इथेनॉल उत्पादन के लिए ‘बी’ हैवी मोलेसेज शीरे को स्थानांतरित कर रही हैं। देश के तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य- कर्नाटक में चीनी उत्पादन भारी गिरावट के साथ 16.3 लाख टन रह गया जो पूर्व वर्ष की समान अवधि में 21 लाख टन था। आंकड़ों से पता लगता है कि दिसंबर 2019 तक गुजरात में चीनी उत्पादन 2,65,000 टन, बिहार में 2,33,000 टन, पंजाब 1,60,000 टन, हरियाणा 1,35,000 टन, उत्तराखंड 1,06,000 टन, मध्य प्रदेश 1,00,000 टन, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना 96,000 टन और तमिलनाडु में 95,000 टन तक पहुंच गया है। निर्यात के बारे में, उद्योग निकाय ने कहा कि सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2019 की तिमाही के दौरान एमएईक्यू के तहत चीनी मिलों द्वारा किए गए वास्तविक निर्यात की समीक्षा करने की प्रक्रिया में है, और जैसा कि पहले ही घोषित किया गया है कि निर्यात नहीं किये जा सके चीनी के कोटा उन चीनी मिलों को आवंटित किये जायें जिन्होंने निर्यात को अंजाम दे दिया है और अब वे अपने एमएईक्यू कोटा के अलावा अतिरिक्त कोटा लेने के लिए तैयार हैं। इसने कहा, ‘‘निर्यात नहीं किये जा सके एमएईक्यू / अतिरिक्त कोटा का पुन: आवंटन इच्छुक चीनी मिलों को करने से विपणन वर्ष 2019-20 के दौरान एमएईक्यू लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।’’