यूपीएसएमए कराएगी अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस सतत विकास और
भविष्य की तकनीक पर होगा मंथन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीएसएमए) आगामी 21 और 22 मई, 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है। सम्मेलन का मुख्य विषय “चीनी उद्योग: भविष्य के लिए सतत विकास का मार्ग” रखा गया है।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ थाईलैंड, नेपाल, श्रीलंका, मिस्र, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक देशों के विशेषज्ञ एवं उद्योग प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन में मुख्य रूप से चीनी मिलों के प्रसंस्करण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकने वाली अत्याधुनिक तकनीकों तथा मूल्यवर्धित उत्पादों—जैव ऊर्जा, जैव रसायन और जैव-प्लास्टिक—के विकास एवं निर्माण पर चर्चा की जाएगी।
चीनी उत्पादन में कमी और भविष्य की चुनौतियां
सम्मेलन के एजेंडे में गन्ने की उत्पादकता बढ़ाना प्रमुख विषयों में शामिल है। वर्तमान चीनी सत्र 2025-26 में बेहतर गन्ना किस्मों की सीमित उपलब्धता के कारण उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन घटकर लगभग 90.00 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 92.45 लाख मीट्रिक टन था।
सम्मेलन के मुख्य सलाहकार एवं राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि गन्ने की नई एवं उच्च उत्पादकता वाली किस्मों के विकास, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 में गन्ना उत्पादन में संभावित कमी को देखते हुए एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करने की रणनीतियों पर भी विशेषज्ञों के बीच गहन चर्चा होगी।
‘शर्करा भूषण’ सम्मान
यूपीएसएमए के महासचिव दीपक गुप्तारा ने बताया कि सम्मेलन के दौरान चीनी उद्योग में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विशिष्ट हस्तियों को प्रतिष्ठित ‘शर्करा भूषण’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय चीनी उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने, तकनीकी दक्षता बढ़ाने तथा निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।



