डॉ. प्रियंका सिंह उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की सीनियर साइंटिस्ट डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि में एआई का उपयोग बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि गन्ने की खेती के लिए ‘शुगरकेन टास्कफोर्स’ का गठन किया जाए। उनके अनुसार, एआई तकनीक मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकती है और पानी व खाद के अत्यधिक उपयोग को रोक सकती है। उन्होंने कहा कि हर किसान तक यह टेक्नोलॉजी पहुंचनी चाहिए ताकि उत्पादकता बढ़ सके। डॉ. प्रियंका ने रासायनिक खाद के साथ जैविक और कार्बनिक खाद पर भी जोर देने की आवश्यकता बताई और कहा कि किसानों की समय-समय पर कैपेसिटी बिल्डिंग आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि शोध संस्थान, किसान और चीनी मिलें मिलकर काम करें ताकि बेहतर रिसर्च सामने आए।
गन्ने में एआई की जरूरत और टास्कफोर्स के गठन का सुझाव

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डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का समावेश
**कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने चीनी मिलों में एआई, रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के महत्व पर जोर देते हुए इन्हें दक्षता बढ़ाने और लागत घटाने के लिए आवश्यक बताया।**

'युद्ध, मौसम और अपशिष्ट' की चुनौतियां....
**‘शुगर एनएक्सटी 2026’ में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तनाव और एथेनॉल लक्ष्यों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए चीनी उद्योग के लिए तकनीक आधारित और टिकाऊ विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया।**

भारतीय चीनी उद्योग का भविष्य और डिजिटल क्रांति..
**नई दिल्ली में आयोजित ‘शुगर एनएक्सटी’ कॉन्क्लेव 2026 में चीनी उद्योग के डिजिटल परिवर्तन, एथेनॉल, बायो-एनर्जी और एआई आधारित तकनीकों पर जोर दिया गया। सम्मेलन में 3,600 से अधिक प्रतिभागियों वाले हैकाथॉन के विजेता नवाचारों को भी सम्मानित किया गया।**
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