News

नए शुगर मिल में शिफ्ट होगी डिस्टलरी, एथनॉल का उत्पादन बढे़गा

 

प्रदेश की एकमात्र सहकारी डिस्टलरी को अब नई शुगर मिल प्लांट में शिफ्ट करने की तैैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए शुगर मिल और डिस्टलरी प्रबंधन की तरफ से करीब 78 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। डिस्टलरी नई शुगर मिल में शिफ्ट होने के बाद यहां से शराब का उत्पादन करीब 54 हजार पेटियां प्रति महीना का रहेगा। वहीं एथनॉल का उत्पादन 30 हजार लीटर प्रति दिन की औसत से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 45 हजार लीटर प्रतिदिन पर पहुंच जाएगा। इससे ईंधन का एक अन्य विकल्प ज्यादा मात्रा में तैयार हो सकेगा। वर्ष 2020 तक इसके संचालित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अधिकारियों कहना है कि आने वाले एक से डेढ़ महीने में डिस्टलरी को शिफ्ट करने का टेंडर निकाला जाएगा। इसके बाद नई शुगर मिल के चालू होने के साथ इसे भी शुरू कर दिया जाएगा। बता दें कि नई शुगर मिल पर करीब 306 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ डिस्टलरी शिफ्ट करने का बजट भी करीब 78 करोड़ रुपये का है। इस हिसाब से पूरे प्लांट की शिफ्टिंग पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च होने जा रहे हैं। ईंधन का वैकल्पिक रूप है एथनॉल : एथनॉल ईंधन का एक बेहतरीन विकल्प है। इसे पेट्रोल-डीजल के साथ मिलाकर ईंधन की खपत को कम किया जा सकता है। शुगर मिल में आने वाले गन्ने में से चीनी के अलावा भी कई पदार्थ निकाले जाते हैं। इनमें से एथनॉल भी एक है। गन्ने से प्राप्त शीरे में से कच्ची शराब के साथ एथनॉल निकलता है। यह तरल अवस्था में रहता है। इसे यहां से कैंटरों में भरकर रिफाइनरी में भेजा जाता है। रिफाइनरी से यहां एक प्रतिशत के हिसाब से पेट्रोल और डीजल में मिलाकर आगे सप्लाई करते हैं। भारत में इसका इस्तेमाल ईंधन के साथ 5 प्रतिशत तक किया जा सकता है। जबकि ब्राजील जैसे देश इसे 10 प्रतिशत तक इसका इस्तेमाल करते हैं। यह ईंधन की बचत करने का बेहतर तरीका भी है।

डिस्टलरी के साथ शिफ्ट होंगे चार प्लांट : सहकारी डिस्टलरी के साथ यहां पर बनाए गए चार प्लांटों को भी शिफ्ट किया जाएगा। इनमें एथनॉल, एमए, आरओ और सीओटू प्लांट शामिल हैं। इससे नए शुगर मिल में इन प्लांटों से बनाए जाने वाले उत्पादों को एक नया रूप मिलेगा। इनसे कार्बन डाईआक्साइड, एथनॉल ईंधन व पर्यावरण स्वच्छता के लिए स्पेंड वॉश को बढ़ावा दिया जाएगा। पहले बजट में मिली थीं खामियां : कुछ महीने पहले डिस्टलरी के बजट को मंजूरी के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय भेजा गया था। इस पर असिस्टेंट फाइनेंस कमिश्नर मोनिका अरोड़ा ने प्लांट पर दौरा कर बजट की खामियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इसके टेंडर को भी रद्द किया गया था। इसके बाद अधिकारियों ने फिर से संशोधित कर बजट भेजने का प्रस्ताव भी रखा था। इस बार शुगर मिल प्रबंधन द्वारा करीब 78 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।

पुराने शुगर मिल में बनी डिस्टलरी को नई प्लांट में शिफ्ट किया जा रहा है। इसके लिए प्रबंधन की तरफ से करीब 78 करोड़ रुपये का बजट बनाकर भेजा गया है। इसके साथ यहां बने चार प्लांटों को भी नई शुगर मिल में डिस्टलरी के साथ शिफ्ट किया जाएगा। यह काम एक डेढ़ महीने में टेंडर द्वारा करवाए जाने की उम्मीद है। – संजीव शर्मा, पीए, प्रबंधक। यहां शराब का उत्पादन 50 हजार पेटियां प्रति महीने का है। जो नई प्लांट में जाने के बाद भी इतना ही रहेगा। यहां पर एथनॉल 30 हजार लीटर प्रतिदिन का है, जो नए प्लांट में जाने के बाद 45 हजार लीटर प्रति दिन का हो जाएगा। इसके लिए बजट बनाकर भेजा गया है। जल्द ही टेंडर निकाल कर काम शुरू किया जाना है। – रमेश सरोहा, डिस्टलरी मैनेजर।

Show More

Related Articles

Close